अन्ना के आंदोलन के समर्थन में जहां एक ओर लोगों का हूजूम देश भर में उमड़ पड़ा है, वहीं दूसरी ओर एक ऐसा तबका भी है जो कह रहा है कि आंदोलन नहीं सीधे ब्लैकमेलिंग है।
इन लोगों का कहना है कि कानून बनाने का काम लोकतंत्र के चुने हुए प्रतिनिधियों का है और इस तरह जबरदस्ती से कानून नहीं बनवाया जा सकता।
मगर, सवाल है कि अगर कानून बनाने का अधिकार जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों का है, तो क्या खुद जनता अपने प्रतिनिधयों को यह बता नहीं सकती कि उसे कैसा कानून चाहिए?
No comments:
Post a Comment